15 August Independence Day Speech in Hindi |Independence Day पर भाषण(2021)।

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे नए BLOG, Independence Day Speech in Hindi में। दोस्तों Independence Day आने वाला है और इस अवसर पर हम सभी अपने अपने अध्यापकों के लिए कुछ करना चाहते हैं । अगर आप अपने अध्यापक के लिए कोई भाषण सुनाना चाहते हैं, तो जरूर पढ़ें हमारा ब्लॉगस्वतंत्रता दिवस पर भाषण । इससे आप अपनी Speech on Independence Day आसानी से तैयार कर सकते हैं। हम बहुत सरल शब्दों में बताएँगे की कैसे तैयार करें।

Independence Day speech in Hindi

Independence Day Speech in Hindi |Independence Day पर भाषण

सबसे पहले आप मंच पर जाएंगे और अपने अध्यापकों और आध्यापिकाओं और अपने से बड़ों का अभिवादन करेंगे, अपने से छोटे और बराबर वालों को अपना प्यार देंगे
अब आप बोलेंगे,
आप सभी को स्वतंत्रता दिवस की बहुत बहुत बधाई। दोस्तों आज ही के दिन 1947 को हमारा देश भारत अंग्रेजों के साम्राज्य से आजाद हुआ था। करीब 200 साल की गुलामी झेलने के बाद हिंदुस्तान ने स्वराज्य का सुनहरा दिन देखा। लेकिन अंग्रेज़ राज करने के मक़सद से हिंदुस्तान में नहीं आए थे, दरअसल उनका मक़सद व्यापार करना था परंतु यहाँ के संसाधनो, फसलों को देखकर उनकी आँखें चौंधियाँ गईं और उनकी ईस्ट इंडिया कंपनी को इंग्लैंड की गवरमेंट ने अपने हाथों में ले लिया और हिंदुस्तान में अपनी मनमानी चलाने लगे।

धीरे धीरे अधिकतर स्वदेशी राजा या खरीद लिए गए या झुक गए। और ब्रिटिश सरकार अपने मनमाने तरीके से लोगों से कपास और नील की खेती करवाके इंग्लैंड भिजवाने लगी जनता पर मनमाने ढंग से tax को लगाया गया।

अब देश की जनता अंग्रेजों का मक़सद समझ चुकी थी और वे सभी एक मौके की तलाश में थे जिसके अनुसार 1857 में क्रान्ति करना सुनिश्चित किया गया परंतु समय से पहले ही कई स्थानों पर विद्रोह शुरू हो गया और आधुनिक हथियारों की कमी, सही समय पर सूचनाओ का ना पहुँच पाना और अनेक स्वदेशी राजाओं द्वारा अंग्रेजों का साथ दिये जाने के कारण हमारी क्रान्ति अधिक सफल न हो सकी परंतु इसने अङ्ग्रेज़ी सरकार की नींद उड़ा के रख दी और वे जान गए थे की अब हिंदुस्तान पर ज्यादा समय तक राज्य करना मुश्किल होगा।

1857 की क्रान्ति में तात्या टोपे, रानी लक्ष्मी बाई, मंगल पाण्डेय ने अपने प्राणो की कुर्बानी दी। उन सभी को शत शत नमन। दोस्तों इसके बाद काँग्रेस की स्थापना हुई और काँग्रेस में दो गुट बने एक नरम दल और एक गरम दल। नरम दल का नेर्तत्व गोपाल कृष्ण गोखले, दादाभाई नौरोजी और गरम दल का नेर्तत्व लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और विपिन चन्द्र पाल कर रहे थे।

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अंग्रेजों के द्वारा बनाए गए कानून रौलेट ऐक्ट का विरोध करते हुए लाला लाजपत राय को मार दिया गया। जलियाँवाला बाग में हिंदुस्तानियों को गोलियों से भून दिया गया। बंगाल और पंजाब में हिन्दू-मुस्लिम में फूट डाली। परंतु हिंदुस्तान की जनता अब समझ चुकी थी और कंधे से कंधा मिलाके अँग्रेजी सरकार से लोहा ले रही थी। अंग्रेजों से लड़ते हुए चन्द्र शेखर आज़ाद, सरदार भगत सिंह, रामप्रसाद बिस्मिल और अशफाक़ उल्लाह जैसे क्रांतिकारियों ने अपने प्राणो की कुराबानी दी।

देश उनके योगदान को कभी नहीं भुला सकता। गांधीजी ने भारत छोड़ो आंदोलन, असहयोग आंदोलन और सविनय अवज्ञा आंदोलन जैसे आंदोलनो से ये दिखा दिया की सत्य-अहिंसा के रास्ते पर चलके भी विजय प्राप्त की जा सकती है।  जो क्रान्ति छोटे-छोटे स्तरों पर होने के कारण प्रभावहीन थी, गांधीजी के नेर्तत्व में पूरा देश उनके पीछे आया और अंग्रेजों को भारत छोडने पर मजबूर कर दिया। और 15 अगस्त 1947 को हमारा हिंदुस्तान दशकों की गुलामी से आज़ाद हुआ।

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दोस्तों आज़ादी के बाद भी खतरा टला नहीं था। बल्कि देश में अकाल, भुखमरी, बेरोज़गारी, महामारी, अशिक्षा जैसी गंभीर समस्याएँ थी। हमारा देश खुशनसीब था जिसे पंडित जवाहरलाल नेहरू जैसे आधुनिक और क्रांतिकारी सोच वाले प्रधानमंत्री मिले जिन्होने इन सब समस्याओं से डटकर मुक़ाबला किया। और भारत फिर से अपनी रफ्तार से विश्व के साथ कंधे से कंधा मिलाके चलने लगा और एक नए आयाम को छूया।

आज हमारा देश विश्व का सबसे बड़ा लोकतन्त्र है तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, मंगलयान, चंद्रयान जैसे यान हैं, 2022 अक हिंदुस्तान अन्तरिक्ष में इंसान भेजेगा। आज हिंदुस्तान की सेना विश्व की सबसे बहादुर सेनाओं में से एक है। हमारे देश के सामने कई मुश्किलें आई हैं और उन सब का हमने डटके मुक़ाबला किया है और ऐसे ही आगे भी करते रहेंगे। हिंदुस्तान विविधताओं वाला देश है। अलग-अलग रंग-रूप, भाषा, संप्रदाय के लोग प्रेम से एक दूसरे के साथ रहते हैं और मुझे पूरी उम्मीद है की वे अपनी एकता ऐसे ही बनाए रखेंगे। अनेकता में एकता हमारे देश की पहचान है।

मुझे गर्व है की मैं हिंदुस्तान में पैदा हुआ हूँ और सभी शहीदों को धन्यवाद देता हूँ जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपने प्राण  त्याग दिये।और आप सभी का आभार व्यक्त करता हूँ की आपने मुझे अपने विचार व्यक्त करने का मौका दिया।
जय हिन्द जय भारत।

निकर्ष

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